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IBADAT


रोज़ तारों की नुमाइश में 
खलल पड़ता है ,

चाँद भी पागल है,
सिर्फ रातों में निकल पड़ता है,

आई है याद उनकी, 
सिर्फ ए सांसों थम जाना ज़रा. . . . 

दिल के धड़कने से भी ,
उनकी इबादत में खलल पड़ता है !!

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