Ilzam .....




"सूखे पत्ते की तरह गिरा रहा है कोई,
बेवजाह हमें सता रहा है कोई,
"रस्क" क्या-क्या न लुटाया हमने दोस्ती में,
फिर भी इलज़ाम पे इलज़ाम लगा कोई"

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