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Ilzam .....




"सूखे पत्ते की तरह गिरा रहा है कोई,
बेवजाह हमें सता रहा है कोई,
"रस्क" क्या-क्या न लुटाया हमने दोस्ती में,
फिर भी इलज़ाम पे इलज़ाम लगा कोई"

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Bewafa

"रस्क" .... 
वफादार..और तुम...? ख्याल अच्छा है...
बेवफा और हम...? इल्जाम भी अच्छा है... 

बस मुस्कुरा के देख..

लफ़्जों के इत्तेफाक में...  युँ बदलाव करके देख...  तु देखकर ना मुस्कुरा... बस मुस्कुरा के देख...

jajbaat

कभी हम टूटे तो कभी ख्वाब टूटे, न जाने कितने टुकड़े में अरमान टूटे !! हर टुकड़ा  आइना है ज़िन्दगी का "रस्क" , हर आईने के साथ लाखों जज़्बात टूटे !!