Wednesday, June 22, 2016

Sabr


आगे सफर था और पीछे हमसफर था
रूकते तो सफर छूट जाता और चलते तो हमसफर छूट जाता..

मंजिल की भी हसरत थी और उनसे भी मोहब्बत थी..

ए दिल तू ही बता,उस वक्त मैं कहाँ जाता...



मुद्दत का सफर भी था और बरसो का हमसफर भी था

रूकते तो बिछड जाते और चलते तो बिखर जाते....

यूँ समँझ लो, "रस्क" 


प्यास लगी थी गजब की मगर पानी मे जहर था...

पीते तो मर जाते और ना पीते तो भी मर जाते.


बस यही दो मसले, जिंदगीभर ना हल हुए!!!

ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए!!!


वक़्त ने कहा.....काश थोड़ा और सब्र होता!!!

सब्र ने कहा....काश थोड़ा और वक़्त होता!!!

Titli

कभी तितली को तरह, कभी सावन की तरह ! हमने चाहा है जिसे, टूटकर बचपन की तरह !! मेरी गजले हसी जेवर है, वो पहने तो सही ! उसकी ...