कुछ गहरा सा लिखना था ,
"इश्क़" से ज्यादा क्या लिखूं..!
कुछ ठहरा सा लिखना था ,
"दर्द" से ज्यादा क्या लिखूं..!
कुछ समन्दर सा लिखना था ,
"आँसू" से ज्यादा क्या लिखूं..!
अब जिन्दगी लिखनी है ,
"मन" तुमसे ज्यादा क्या लिखूं..!
कुछ गहरा सा लिखना था ,
"इश्क़" से ज्यादा क्या लिखूं..!
कुछ ठहरा सा लिखना था ,
"दर्द" से ज्यादा क्या लिखूं..!
कुछ समन्दर सा लिखना था ,
"आँसू" से ज्यादा क्या लिखूं..!
अब जिन्दगी लिखनी है ,
"मन" तुमसे ज्यादा क्या लिखूं..!
उनसे पहली मुलाकात थी ,
वो सड़क के उस पार थी ,
वो मुझ से अनजान थी,
और में उससे बेखबर था !
आटे से सने उसके थे हाथ,
पता ही नहीं चला कब हो गए साथ,
वो उसकी बिखरी बिखरी सी जुल्फे!
वो हमारी पहली मुलाकात अहसास ,
कुछ तरह का था !
उसकी निगाहे हमें तलाश रही थी,
वो अपनी जुल्फे सम्भाल रही थी ,
और "मन" मैं खुद को !!
कुछ गहरा सा लिखना था , "इश्क़" से ज्यादा क्या लिखूं..! कुछ ठहरा सा लिखना था , "दर्द" से ज्यादा क्या लिखूं..! कुछ समन्...