Thursday, August 30, 2018

Titli





कभी तितली को तरह, कभी सावन की तरह !

हमने चाहा है जिसे, टूटकर बचपन की तरह !!
मेरी गजले हसी जेवर है, वो पहने तो सही !
उसकी आवाज नज़र आयगी, दुल्हन की तरह !!
लब्ज और सुर का ये, रिश्ता भी अजब रिश्ता है !
चंद लम्हों की ये पहचान, बंधन की तरह !!
वो नज़र आये तो मैं , खुद को संवारू "!
वो हँसी साज है, मेरे लिए दर्पण की तरह !!

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