Saturday, August 20, 2016

ख़लिश





ये कैसी ख़लिश है तेरे इंतज़ार की,

रहा भी नहीं जाता, सहा भी नहीं जाता !

क्या कहे के कुछ कहा नहीं जाता ,
दर्द मीठा है पर सहा नहीं जाता !!

मोहब्बत हो गई है इस कदर आपसे ,
"रस्क" बिना याद किये रहा नहीं जाता !!

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कब तक

  मैं नहीं जानता इस दुनिया में कब तक हूं, लेकिन जब तक हूं "मन" सिर्फ तेरा हूं!!