Tuesday, August 4, 2015

App Muskuraoge


कुछ गम जो आपके सफों पे लिखे है  संवर जायेंगे !
वक़्त खुद ब खुद काट जाएंगे जब आप मुस्कुरायगे !!

लबो पे अपने तल्ख़िया आने मत दीजिये !
हंस के बाते जो करेंगे गैर अपने  बन जायेंगे !!
कुछ गम जो आपके सफों पे लिखे है  संवर जायेंगे !
वक़्त खुद ब खुद काट जाएंगे जब आप मुस्कुरायगे !!

 शोखी है शाख पर सोच कोई दरख़्त नहीं काटिए !
सावन न लौट के आएगा परदेश से घर आएंगे !!
कुछ गम जो आपके सफों पे लिखे है  संवर जायेंगे !
वक़्त खुद ब खुद काट जाएंगे जब आप मुस्कुरायगे !!

नासूर भी बन सकते है अब और इन्हे न छेडिये !
"रस्क" छोड़गे इनके हाल भी तो ये जख्म भी भर जायेंगे !!

No comments:

Post a Comment

तुमसे ज्यादा

  कुछ गहरा सा लिखना था ,  "इश्क़" से ज्यादा क्या लिखूं..! कुछ ठहरा सा लिखना था , "दर्द" से ज्यादा क्या लिखूं..! कुछ समन्...