Tuesday, August 18, 2015
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तुमसे ज्यादा
कुछ गहरा सा लिखना था , "इश्क़" से ज्यादा क्या लिखूं..! कुछ ठहरा सा लिखना था , "दर्द" से ज्यादा क्या लिखूं..! कुछ समन्...

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बात दिन की नहीं अब रात से डर लगता है, घर है कच्चा मेरा, बरसात डर लगता गई !! तेरे तोहफे ने तो बस खून के आंसू ही दिए, ज़िंदगी अ...
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मैं वहीं पर खड़ा तुमको मिल जाऊँगा, जिस जगह जाओगे तुम मुझे छोड़ कर। अश्क पी लूँगा और ग़म उठा लूँगा मैं, सारी यादों को सो जाऊंगा ओढ़ कर ।। ...
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कुछ वक़्त पहले मुझे भी जिन्दगी ने आज़माया था ! किसी के साथ मैंने भी हँसता हुआ पल बिताया था !! रोता हुआ छोड़ गए तो क्या हुआ ! हसना भ...
bahut achi kavita hai i like it
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