Tuesday, January 9, 2024

Divangi ka Taj

एक शख्स मुझको सोंप का दीवानगी का ताज,

जंगल की आबरू का निगेहबान कर गया !

कब तक मेरी वाफाओ से दमन छुडाओगे,

वो दिन भी आएगा के मुझे खुद बुलाओगे !

हम ना रहेंगे एक दिन ऐसा भी आएगा ,

तस्वीर को हमारी गले लगाओगे !

हँसते हो देख कर हम से गरीब को ,

करवट जो लेगा वक़्त  सब भूल जाओगे !

तनहाइयों में आएगी "रस्क" मेरी जो याद ,

हलके सुरों से गजले मेरी गुनगुनाओगे !!  

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