Sunday, July 15, 2018

तेरी आँखें तो मेरी हैं, मैं इन को रुलाऊँ कैसे.


टूट जाये न भरम होंठ हिलाऊँ कैसे..
हाल जैसा भी है लोगों को बताऊँ कैसे..

खुश्क आँखों से भी अश्कों की महक आती है ..
मैं तेरे ग़म को ज़माने से छुपाऊँ कैसे..

तू ही बता मेरी यादों को भुलाने वाले..
मैं तेरी याद को इस दिल से भुलाऊँ कैसे..

फूल होता तो तेरे दर पे सजा रहता..
ज़ख़्म ले कर तेरी दहलीज़ पे आऊं कैसे..

तू रुलाता है तो रुला मुझे जी भर के..
तेरी आँखें तो मेरी हैं, मैं इन को रुलाऊँ कैसे..

Friday, July 13, 2018

इन बाहों के घेरो से !




ना  जाने कब तुम मेरे ख्यालों से निकल कर ,
मेरे खवाबों में बस जाते हो ,
मैं तुम्हे सोचता ही रहता हूँ तन्हा तन्हा ,
और ना जाने तुम कब मुझे जुल्फों में कैद कर देते हो !
मैं तमाम उम्र क़ैद रहना चाहता हूँ ,इन जुल्फों में ,
ना जाने कब जुल्फों से निकाल  कर बाँहों में  घेर लेते हो ,
मुझे आजाद ना करो  इन बाहों के घेरो से !
मैं तमाम उम्र क़ैद रहना चाहता हूँ 
मुझे आजाद ना करो  इन बाहों के घेरो से !

Sunday, July 8, 2018

मैं वहीं पर खड़ा तुमको मिल जाऊँगा





मैं वहीं पर खड़ा तुमको मिल जाऊँगा,
जिस जगह जाओगे तुम मुझे छोड़ कर।
अश्क पी लूँगा और ग़म उठा लूँगा मैं,
सारी यादों को सो जाऊंगा ओढ़ कर ।।

जब भी बारिश की बूंदें भिगोयें तुम्हें
सोच लेना की मैं रो रहा हूँ कहीं,
जब भी हो जाओ बेचैन ये मानना
खोल कर आँख में सो रहा हूँ कहीं,
टूट कर कोई केसे बिखरता यहाँ
देख लेना कोई आइना तोड़ कर;
मैं वहीं पर खड़ा तुमको.......


रास्ते मे कोई तुमको पत्थर मिले
पूछना कैसे जिन्दा रहे आज तक,
वो कहेगा ज़माने ने दी ठोकरें
जाने कितने ही ताने सहे आज तक,
भूल पाता नहीं उम्रभर दर्द जब
कोई जाता है अपनो से मुंह मोड़ कर;
मैं वहीं पर खड़ा तुमको......

मैं तो जब जब नदी के किनारे गया
मेरा लहरों ने तन तर बतर कर दिया,
पार हो जाऊँगा पूरी उम्मीद थी
उठती लहरों ने पर मन में डर भर दिया,
रेत पर बेठ कर जो बनाया था घर
आ गया हूँ उसे आज फिर तोड़ कर;
मैं वहीं पर खड़ा तुमको.......

Thursday, June 7, 2018

Cofee



तेरे हाथ की ब्लैक कॉफी भी हमें मीठी लगती है !
जब तुम मुस्कुरा कर पीने को  कहते हो !!

Tuesday, December 26, 2017

khush hai wo


बड़े खुश है आज मेरे बिना भी वो,
जो दूर जाने के जिक्र पे होंठो पे हाथ रख देते थे..

Dost

मै यादों का किस्सा खोलूँ तो,
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.
मै गुजरे पल को सोचूँ तो,
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.
अब जाने कौन सी नगरी में,
आबाद हैं जाकर मुद्दत से.
मै देर रात तक जागूँ तो ,
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.
कुछ बातें थीं फूलों जैसी,
कुछ लहजे खुशबू जैसे थे,
मै शहर-ए-चमन में टहलूँ तो,
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.
सबकी जिंदगी बदल गयी
एक नए सिरे में ढल गयी
किसी को नौकरी से फुरसत नही
किसी को दोस्तों की जरुरत नही
कोई पढने में डूबा है
कोई पढाने मे
सारे यार गुम हो गये हैं
"तू" से "तुम" और "आप" हो गये है
मै गुजरे पल को सोचूँ
तो, कुछ दोस्त
बहुत याद आते हैं.
धीरे धीरे उम्र कट जाती है
जीवन यादों की पुस्तक बन जाती है,
कभी किसी की याद बहुत तड़पाती है
और कभी यादों के सहारे ज़िन्दगी कट जाती है ...
किनारो पे सागर के खजाने नहीं आते, फिर जीवन में दोस्त पुराने नहीं आते ...
जी लो इन पलों को हस के दोस्त,
फिर लौट के दोस्ती के जमाने नहीं आते ..

Sunday, December 24, 2017

Silent love

उसकी रूह में सन्नाटा है  और मेरी आवाज में चुप्पी !
वो अपने अंदाज़ में चुप, मै मेरे अंदाज में चुप !!

तेरी आँखें तो मेरी हैं, मैं इन को रुलाऊँ कैसे.

टूट जाये न भरम होंठ हिलाऊँ कैसे.. हाल जैसा भी है लोगों को बताऊँ कैसे.. खुश्क आँखों से भी अश्कों की महक आती है .. मैं तेरे ग़...