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Dost



मेरी रुह निकलने वाली होगी
मेरी सांस बिखरने वाली होगी
फ़िर दामन जिंदगी का छूटेगा
धागा सांस का भी छूटेगा
फ़िर वापस हम ना आयेंगे
फ़िर हमसे कोइ ना रुठेगा
फ़िर आंखोंमे नुर ना होगा
फ़िर दिल गम से चुर ना होगा
उस पल तुम हमको थामोगे
हम से दोस्त अपना फ़िर मांगोगे
फ़िर हम ना कुछ भी बोलेंगे
और आंखें भी ना खोलेंगे
उस पल तुम रो दोगे
और दोस्त अपना खो दोगे, दोस्त अपना खो दोगे

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