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Tmhari Muhbbat


तुम मोहब्बत  भी , मौसम की , तरह निभाते हो,
कभी बरसते हो , कभी  बूँद को , तरसाते हो !

पल मैं कहते हो, ज़माने मैं, फ़क़त तेरे है, 
पल मैं,  इज़हार ऐ मुहब्बत से, मुकर जाते हो !!

भरी महफ़िल में, दुश्मनो की तरह, मिलते हो,
और दुआओं में, "रस्क" मेरा नाम लिए जाते हो !

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"रस्क" .... 
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कभी हम टूटे तो कभी ख्वाब टूटे, न जाने कितने टुकड़े में अरमान टूटे !! हर टुकड़ा  आइना है ज़िन्दगी का "रस्क" , हर आईने के साथ लाखों जज़्बात टूटे !!